अद्भुत...अकल्पनीय....उत्तराखंड में ऐसी कई जगहें हैं, जिन्हें देख लोग आज भी हैरान रह जाते हैं। हर कोई यही कहता है कि हो न हो, यहां कुछ न कुछ रहस्य जरूर छिपे हैं, जिन्हें खोजे जाने की जरूरत है।
आज हम आपको उत्तराखंड की एक ऐसी ही रहस्यमयी गुफा के बारे में बताने जा रहे हैं, जहां महाभारत काल का एक रहस्य छिपा हुआ है। इस रहस्य के बारे में कोई नहीं जानता। ये रहस्यमयी गुफा उत्तराखंड के माणा गांव में स्थित है, जिसे हम व्यास गुफा के नाम से जानते हैं। माणा गांव देश का आखिरी गांव है। यहां पर एक छोटी सी गुफा है, जो कि लोगों को आज भी हैरान किए हुए है। कहते हैं व्यास गुफा वही जगह है, जहां हजारों साल पहले महर्षि वेद व्यास ने वेदों और पुराणों का संकलन किया था। इसी गुफा में वेद व्यास ने भगवान गणेश की सहायता से महाकाव्य महाभारत की रचना की थी।
वेद व्यास गुफा की छत बेहद अनोखी है। इस छत को देखने पर ऐसा लगता है, जैसे बहुत से पन्नों को एक के ऊपर एक रखा हुआ है। गुफा की छत को लेकर कई तरह की मान्यताएं हैं। जिनमें से एक ये भी है कि महर्षि वेद व्यास ने भगवान गणेश से महाभारत के कुछ खास पन्ने लिखवाए तो थे, लेकिन उसे उस महाकाव्य में शामिल नहीं किया। वेद व्यास ने उन पन्नों को अपनी शक्ति से पत्थर में बदल दिया। आज दुनिया पत्थर के इन रहस्यमयी पन्नों को 'व्यास पोथी' के नाम से जानती है। व्यास पोथी को लेकर हर किसी के मन में यही सवाल पैदा होता है कि आखिर वो कौन सा राज था, जिसे वेद व्यास पूरी दुनिया से छिपाना चाहते थे। पहली नजर में व्यास गुफा की छत ऐसी लगती है, जैसे उस पर कोई विशालकाय पुस्तक रखी हुई है। व्यास गुफा महाभारत की कहानी का वो हिस्सा है, जिसके बारे में महर्षि वेद व्यास और भगवान गणेश के अलावा और कोई नहीं जानता। ये जगह आज भी लोगों के लिए रहस्य बनी हुई है।